नोएडा। नोएडा स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनी, पीपीएस इंटरनेशनल फर्म के खाते से डेढ़ करोड़ रूपये से ज्यादा की धोखाधड़ी कर ली गई है। फर्म के खाते से एक करोड़ 66 लाख 52 हजार 500 रुपये नेट बैंकिंग के जरिए निकाल लिए गए हैं। फर्म का खाता नोएडा के सेक्टर 27 स्थित पंजाब नेशनल बैंक में है। इस संबंध में कोतवाली सेक्टर 20 पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। बैंक में हुआ यह फर्जीवाड़ा अब तक का सबसे बड़ी साइबर क्राइम की वारदात है।
पीपीएस इंटरनेशनल फर्म के मालिक पवन कुमार अग्रवाल सेक्टर 50 में रहते हैं। उनकी फर्म से यह रकम 29 सितम्बर से सात अक्टूबर के बीच इंटरनेट बैंकिंग के जरिए सात बार में ट्रांसफर की गई है। इस बीच वह व्यापार के सिलसिले में विदेश गए हुए थे। विदेश से लौटने के बाद शनिवार को वह फर्म के खाते की जानकारी लेने बैंक गए हुए थे। बैंक से मिली जानकारी के आधार पर उन्हें मामले की जानकारी हुई। बैंक से मिली जानकारी के अनुसार फर्म के खाते से सबसे पहले 29 सितम्बर को 20,51,500 रूपये इंटरनेट बैकिंग के जरिए हस्तारिंत किए गए थे। यह रकम मुंबई की पीएनबी शाखा में मैसर्स ए-1 चैनल लोजैस्टिक प्रा. लि. के खाते में हस्तारिंत की गई थी। इसी दिन ए-1 चैनल के खाते से 16,00,000 रुपये नकद निकाले गए। इसके अलावा 4,00,000 का डीडी बनवाया गया। दूसरा ट्रांजेक्शन भी 29 सितम्बर को 20,00,000 रुपये व 21,00,000 रुपये और 4,00,000 रुपये (कुल 45 लाख रुपये) का किया गया। यह रकम एन वैन्गटेस्वरन कोयम्मबटूर के पीएनबी के खाते में इंटरनेट से हस्तारिंत की गई। इस खाते से 15,00,000 रुपये की रकम इसी दिन स्टैंडर्ड चार्टड बैंक मुंबई की किसी शाखा में हस्तारिंत कर दिया गया। शेष 30,00,000 रुपये आईसीआईसीआई की मुंबई की किसी शाखा में हस्तांतरित किए गए।
इसी तरह 81,00,000 रुपये का तीसरा ट्रांजेक्शन एक अक्टूबर को मै. मिनरानी एक्नसपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स गोवा के पीएनबी खाते में हस्तांतरित किया गया। यहां से 75,00,000 रुपये की रकम छह अक्टूबर को मै. एशियाटिक स्टेट डेवलेपर्स प्रा. लि. गोवा के आईसीआईसीआई बैंक के खाते में भेज दी गई। यहां से एशियाटिक स्टेट डेवलेपर्स ने 70,00,000 रुपये नगद निकाल लिए। इसके बाद छह अक्टूबर को मैं भिनरानी एक्सपोर्ट्स ने अपने खाते में शेष बची 5,00,000 रुपये की रकम आदर्श इंटरप्राइजेज के एसबीआई मैसूर (संदूर) स्थित शाखा में ट्रांसफर कर दी।
चौथी बार एक अक्टूबर को ही एन वैन्गटेस्वरन कोयम्मबटूर के पीएनबी खाते में एक हजार रुपये इंटरनेट के जरिए हस्तांतरित किए गए। इसके बाद सात अक्टूबर को 20,00,000 रुपये फिर से एन वैन्गटेस्वरन कोयम्मबटूर के खाते में हस्तांतरित किए गए। जो अब भी उसके खाते में सुरक्षित रखी हुई है।
पीपीएस इंटरनेशनल फर्म के मालिक पवन कुमार अग्रवाल सेक्टर 50 में रहते हैं। उनकी फर्म से यह रकम 29 सितम्बर से सात अक्टूबर के बीच इंटरनेट बैंकिंग के जरिए सात बार में ट्रांसफर की गई है। इस बीच वह व्यापार के सिलसिले में विदेश गए हुए थे। विदेश से लौटने के बाद शनिवार को वह फर्म के खाते की जानकारी लेने बैंक गए हुए थे। बैंक से मिली जानकारी के आधार पर उन्हें मामले की जानकारी हुई। बैंक से मिली जानकारी के अनुसार फर्म के खाते से सबसे पहले 29 सितम्बर को 20,51,500 रूपये इंटरनेट बैकिंग के जरिए हस्तारिंत किए गए थे। यह रकम मुंबई की पीएनबी शाखा में मैसर्स ए-1 चैनल लोजैस्टिक प्रा. लि. के खाते में हस्तारिंत की गई थी। इसी दिन ए-1 चैनल के खाते से 16,00,000 रुपये नकद निकाले गए। इसके अलावा 4,00,000 का डीडी बनवाया गया। दूसरा ट्रांजेक्शन भी 29 सितम्बर को 20,00,000 रुपये व 21,00,000 रुपये और 4,00,000 रुपये (कुल 45 लाख रुपये) का किया गया। यह रकम एन वैन्गटेस्वरन कोयम्मबटूर के पीएनबी के खाते में इंटरनेट से हस्तारिंत की गई। इस खाते से 15,00,000 रुपये की रकम इसी दिन स्टैंडर्ड चार्टड बैंक मुंबई की किसी शाखा में हस्तारिंत कर दिया गया। शेष 30,00,000 रुपये आईसीआईसीआई की मुंबई की किसी शाखा में हस्तांतरित किए गए।
इसी तरह 81,00,000 रुपये का तीसरा ट्रांजेक्शन एक अक्टूबर को मै. मिनरानी एक्नसपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स गोवा के पीएनबी खाते में हस्तांतरित किया गया। यहां से 75,00,000 रुपये की रकम छह अक्टूबर को मै. एशियाटिक स्टेट डेवलेपर्स प्रा. लि. गोवा के आईसीआईसीआई बैंक के खाते में भेज दी गई। यहां से एशियाटिक स्टेट डेवलेपर्स ने 70,00,000 रुपये नगद निकाल लिए। इसके बाद छह अक्टूबर को मैं भिनरानी एक्सपोर्ट्स ने अपने खाते में शेष बची 5,00,000 रुपये की रकम आदर्श इंटरप्राइजेज के एसबीआई मैसूर (संदूर) स्थित शाखा में ट्रांसफर कर दी।
चौथी बार एक अक्टूबर को ही एन वैन्गटेस्वरन कोयम्मबटूर के पीएनबी खाते में एक हजार रुपये इंटरनेट के जरिए हस्तांतरित किए गए। इसके बाद सात अक्टूबर को 20,00,000 रुपये फिर से एन वैन्गटेस्वरन कोयम्मबटूर के खाते में हस्तांतरित किए गए। जो अब भी उसके खाते में सुरक्षित रखी हुई है।