भ्रष्टाचार ते लड़ाई के लिए की थी वारदात
नोएडा। पुलिस ने भारतीय स्टेट बैंक में दिन दहाड़े हुई डकैती की वारदात का आज खुलासा कर दिया। पुलिस ने इस मामले मुठभेड़ के बाद तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में दो पूर्व सैनिक व एक इंजीनियर शामिल है। पुलिस ने उनके कब्जे से लूट के 9 लाख रुपए व हथियार बरामद किए है।
पुलिस के मुताबिक 12 सितंबर को थाना सैक्टर 24 नोएडा स्थित सैक्टर 12 के स्टेट बैक आफ इन्डिया में हुई लूट ने सनसनी फैला दी थी जिसमें बदमाशों ने लगभग 10 लाख रूपया लूट लिए थे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि 30 सितंबर की शाम 5 बज कर 45 मिनट 12@22 एवं 54 के चैराहे के पास पुलिस को कुछ लोग आते दिखाई दिए, जिन्हे पुलिस ने रूकने का ईशारा किया। लेकिन वे भागने लगे। पुलिस के पिछा करने पर उन्होंने फायरिंग शरू कर दी। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने विवेकानन्द वर्मा उर्फ विवेक पुत्र ढेलू वर्मा निवासी तुलसीमानपुर थाना तिलदा जिला रायपुर छत्तीसगढ सोल्जर 121 लाइट रेजीमेंट 665 एआईआरओपी नासिक सी@ओ 56 एपीओ, राजनारायण उर्फ राजू पुत्र रूपसिहं चौहान निवासी ग्राम भाल थाना राजपुर जिला कानपुर देहात व विजय पुत्र संतराम चौहान निवासी ग्राम भाल थाना राजपुर जिला कानपुर देहात सोल्जर 121 लाइटरेजीमेंट अमृतसर 56 एपीओ को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उनके पास से मोटर साईकिल सीबीजैड एचआर 13बी 7613 व मोबाईल फोन नोकिया 7610 दूसरे के पास से एक अद्द पिस्टल 32 बोर मय 6 कारतुस जिंदा व एक खोखा कारतूस व तीसरे से एक अद्द पिस्टल ३२ बोर मय ७ कार० जिन्दा व एक खोखा कारतूस, बैक के गार्ड से लूटे गये 6 जिन्दा कारतुस 12 बोर, ग्राहको से लूटे गए दो मोबाईल फोन नोकिया बरामद किए गए।
एसएसपी के मुताबिक लूट की घटना का मुख्य सूत्रधार व मास्टर माइंड राजनारायण उर्फ राजू है जिसने अपने चचेरे भाई विजय सिंह के माध्यम से विवेकानन्द उर्फ विवेक से दोस्ती करके दोनो को बैक लूट के लिए यह कह कर प्रोत्साहित किया कि कोई भी क्रान्तिकारी पहले लूट या धनार्जन के लिये हिंसक वारदात करता है। जिससे वह लाकप्रिय हो जाता है व उससे प्राप्त धन को समाज की बुराईयों व भ्रष्टाचार को दूर करने में करता है। इसके लिये उसके द्वारा कई उदाहरण भी प्रस्तुत किये गये। विजय 26 जून से 26 जूलाई और विवेकानन्द 15 जून से 15 जूलाई तक छुट्टी पर आये थे और अपनी नौकरी से गैरहाजिर हो गए। इन लोगों के द्वारा कई बैंको की रैकी की गई जिसके बाद सैक्टर 12 की स्टेट बैंक आफ इन्डिया की शाखा को अजांम देने के लिये उपयुक्त पाया क्योंकि यहां सुरक्षा उपकरणों जैसे अलार्म व सीसीटीवी कैमरे नही थे ओर सुरक्षागार्ड भी कमजोर था। राजनारायण ने र्बैक में जाने से पहले विवेकानन्द को शराब पिलाई व अपनी मोटरसाइकिल को बैंक के बराबर में लगाकर तीनों मय पिस्टल के बैक के अन्दर बैठ गए राजनारायण ने खुद को बैंक में ग्राहकों वाली लाइनों में इसलिए खड़ा किया कि यदि कांई अनहानी होती है तो वह अपनी पिस्टल से विवेकानन्द व विजय को कवर फायर देगा। जब बैंक में कम लोग रह गये तब अभियुक्तगणों द्वारा घटना को अंजाम दिया गया मोटरसाइकिल को पास में सैक्टर 22 में छोड कर विजय व विवेकानन्द रेलवे स्टेशन गाजियाबाद पहुंच गए, वहां से विजय ने फोन करके राजनारायण को रेलवे स्टेशन गाजियाबाद पर बुलाया जहां से कुछ समय रूक कर के ओर इतमीनान करके कि चैकिंग खत्म हो गई। वापस अपने कमरे ई.152 सैक्टर 22 पर आ गये। जहां पर राजनाराण ने 30 हजार रूपये विवेकानन्द को देकर रायपुर के लिये रवाना किया व 37 हजार रूपये विजय को देकर उसके घर भेज दियाए 57 हजार रूपया खरीदी गयी तीन पिस्टल का भुगतान किया गया व 25 हजार रूपये स्वंय अपने काम में लिये गये व शेष रकम को सुरक्षित रख दिया गया ।
नोएडा। पुलिस ने भारतीय स्टेट बैंक में दिन दहाड़े हुई डकैती की वारदात का आज खुलासा कर दिया। पुलिस ने इस मामले मुठभेड़ के बाद तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में दो पूर्व सैनिक व एक इंजीनियर शामिल है। पुलिस ने उनके कब्जे से लूट के 9 लाख रुपए व हथियार बरामद किए है।

पुलिस के मुताबिक 12 सितंबर को थाना सैक्टर 24 नोएडा स्थित सैक्टर 12 के स्टेट बैक आफ इन्डिया में हुई लूट ने सनसनी फैला दी थी जिसमें बदमाशों ने लगभग 10 लाख रूपया लूट लिए थे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि 30 सितंबर की शाम 5 बज कर 45 मिनट 12@22 एवं 54 के चैराहे के पास पुलिस को कुछ लोग आते दिखाई दिए, जिन्हे पुलिस ने रूकने का ईशारा किया। लेकिन वे भागने लगे। पुलिस के पिछा करने पर उन्होंने फायरिंग शरू कर दी। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने विवेकानन्द वर्मा उर्फ विवेक पुत्र ढेलू वर्मा निवासी तुलसीमानपुर थाना तिलदा जिला रायपुर छत्तीसगढ सोल्जर 121 लाइट रेजीमेंट 665 एआईआरओपी नासिक सी@ओ 56 एपीओ, राजनारायण उर्फ राजू पुत्र रूपसिहं चौहान निवासी ग्राम भाल थाना राजपुर जिला कानपुर देहात व विजय पुत्र संतराम चौहान निवासी ग्राम भाल थाना राजपुर जिला कानपुर देहात सोल्जर 121 लाइटरेजीमेंट अमृतसर 56 एपीओ को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उनके पास से मोटर साईकिल सीबीजैड एचआर 13बी 7613 व मोबाईल फोन नोकिया 7610 दूसरे के पास से एक अद्द पिस्टल 32 बोर मय 6 कारतुस जिंदा व एक खोखा कारतूस व तीसरे से एक अद्द पिस्टल ३२ बोर मय ७ कार० जिन्दा व एक खोखा कारतूस, बैक के गार्ड से लूटे गये 6 जिन्दा कारतुस 12 बोर, ग्राहको से लूटे गए दो मोबाईल फोन नोकिया बरामद किए गए।
एसएसपी के मुताबिक लूट की घटना का मुख्य सूत्रधार व मास्टर माइंड राजनारायण उर्फ राजू है जिसने अपने चचेरे भाई विजय सिंह के माध्यम से विवेकानन्द उर्फ विवेक से दोस्ती करके दोनो को बैक लूट के लिए यह कह कर प्रोत्साहित किया कि कोई भी क्रान्तिकारी पहले लूट या धनार्जन के लिये हिंसक वारदात करता है। जिससे वह लाकप्रिय हो जाता है व उससे प्राप्त धन को समाज की बुराईयों व भ्रष्टाचार को दूर करने में करता है। इसके लिये उसके द्वारा कई उदाहरण भी प्रस्तुत किये गये। विजय 26 जून से 26 जूलाई और विवेकानन्द 15 जून से 15 जूलाई तक छुट्टी पर आये थे और अपनी नौकरी से गैरहाजिर हो गए। इन लोगों के द्वारा कई बैंको की रैकी की गई जिसके बाद सैक्टर 12 की स्टेट बैंक आफ इन्डिया की शाखा को अजांम देने के लिये उपयुक्त पाया क्योंकि यहां सुरक्षा उपकरणों जैसे अलार्म व सीसीटीवी कैमरे नही थे ओर सुरक्षागार्ड भी कमजोर था। राजनारायण ने र्बैक में जाने से पहले विवेकानन्द को शराब पिलाई व अपनी मोटरसाइकिल को बैंक के बराबर में लगाकर तीनों मय पिस्टल के बैक के अन्दर बैठ गए राजनारायण ने खुद को बैंक में ग्राहकों वाली लाइनों में इसलिए खड़ा किया कि यदि कांई अनहानी होती है तो वह अपनी पिस्टल से विवेकानन्द व विजय को कवर फायर देगा। जब बैंक में कम लोग रह गये तब अभियुक्तगणों द्वारा घटना को अंजाम दिया गया मोटरसाइकिल को पास में सैक्टर 22 में छोड कर विजय व विवेकानन्द रेलवे स्टेशन गाजियाबाद पहुंच गए, वहां से विजय ने फोन करके राजनारायण को रेलवे स्टेशन गाजियाबाद पर बुलाया जहां से कुछ समय रूक कर के ओर इतमीनान करके कि चैकिंग खत्म हो गई। वापस अपने कमरे ई.152 सैक्टर 22 पर आ गये। जहां पर राजनाराण ने 30 हजार रूपये विवेकानन्द को देकर रायपुर के लिये रवाना किया व 37 हजार रूपये विजय को देकर उसके घर भेज दियाए 57 हजार रूपया खरीदी गयी तीन पिस्टल का भुगतान किया गया व 25 हजार रूपये स्वंय अपने काम में लिये गये व शेष रकम को सुरक्षित रख दिया गया ।