नोएडा। हम कभी नहीं सुधरेगें, जी हां कुछ ऐसी ही है नोएडा पुलिस। चाहे निठारी और या फिर आरूषि और या हो गौतमबुद्ध नगर जिले में गुमशुदा लोगों की तलाश का मामला। वही पुलिस कर्मी जांच का वही पुराना तरीका तो नती
जा नया कैसे हो सकता है। जी हां नोएडा के निठारी कांड के बाद सरकार और पुलिस के अफसरों ने बड़े ही जोर शौर के साथ गुमशुदा लोगों को तलाश करने का काम शुरू किया था, लेकिन हर मामले की तरह यह तेजी ज्यादा दिनों तक चल न सकी। नतीजा अभी तक जनपद के विभिन्न थानों में गुमशुदगी के 308 मामले दर्ज है, जिसमें 104 नाबालिगों में 34 लड़कियां शामिल है। यह आंकड़े हमने नहीं गढ़े हैं, जी हां, यह तो नोएडा पुलिस की वैबसाईट पर मौजूद है।
गुमशुदगी के मामलों
में थाना सेक्टर 20 सबसे आगे है, यहां गुमशुदगी के कुल 91 मामले दर्ज है, जिनमे 34 नाबालिग और 13 लड़कियां शामिल है। इस थाने में सबसे कम उम्र का गुमशुदा 3 वर्ष का बच्चा है। इसी थाना क्षेत्र के निठारी इलाके से वर्ष 2006 तक 31 बच्चों के गुम हुए थे। बाद में यहां से गुम हुए बच्चों का राज डी-5 में जाकर खुला।
दुसरे नंबर पर थाना सेक्टर 24 है। यहां गुमशुदगी के रूप में 31 मामले दर्ज हैं, जिसमे 8 नाबालिग शामिल है। शहरी क्षेत्र में गुमशुदगी के सबसे कम मामले थाना सेक्टर 49 में दर्ज हैं। यहां कुल गुमशुदगी 15 हैं, जिसमें नाबालिग 7 और लड़कियां 2 हैं।
इसी तरह जनपद के अन्य थाने भी कहीं पिछे नहीं है। जनपद के शहरी क्षेत्र में गुमशुदगी के मामले सबसे ज्यादा हैं, जबकि देहात क्षेत्र का मात्र एक थाना दादरी इस मामले में आगे है। दादरी में गुमशुदगी के 29 मामले दर्ज हैं, जिसमे 9 नाबालिग और 4 लड़कियां शामिल हैं। देहात क्षेत्र में सबसे कम गुमशुदगी के मामले ककौड़ थाने में दर्ज है। यहां यह आंकड़ा मात्र 1 है।
यहां अगर हम गुमशुदगी के मामले में कानून की बात न करें तो हम बता दे की सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार यदि गुमशुदा व्यक्ति की तलाश में तीन दिन से ज्यादा का समय लगता है तो एैसे में पुलिस को गुमशदगी के तहत दर्ज मामले को अपहरण की धाराओं में तरमीम कर देना चाहिए। लेकिन वास्तविक्ता इसके एकदम विपरित है। निठारी कांड के बाद पुलिस ने शुरूवाती दौर में कुछ गुमशुदगी के मामलों को अपहरण की धाराओं में तरमीम किया था, लेकिन समय के साथ पुलिय का रवैया पहले के जैसा हो गया।
गुमशुदगी के मामलों
में थाना सेक्टर 20 सबसे आगे है, यहां गुमशुदगी के कुल 91 मामले दर्ज है, जिनमे 34 नाबालिग और 13 लड़कियां शामिल है। इस थाने में सबसे कम उम्र का गुमशुदा 3 वर्ष का बच्चा है। इसी थाना क्षेत्र के निठारी इलाके से वर्ष 2006 तक 31 बच्चों के गुम हुए थे। बाद में यहां से गुम हुए बच्चों का राज डी-5 में जाकर खुला।दुसरे नंबर पर थाना सेक्टर 24 है। यहां गुमशुदगी के रूप में 31 मामले दर्ज हैं, जिसमे 8 नाबालिग शामिल है। शहरी क्षेत्र में गुमशुदगी के सबसे कम मामले थाना सेक्टर 49 में दर्ज हैं। यहां कुल गुमशुदगी 15 हैं, जिसमें नाबालिग 7 और लड़कियां 2 हैं।
इसी तरह जनपद के अन्य थाने भी कहीं पिछे नहीं है। जनपद के शहरी क्षेत्र में गुमशुदगी के मामले सबसे ज्यादा हैं, जबकि देहात क्षेत्र का मात्र एक थाना दादरी इस मामले में आगे है। दादरी में गुमशुदगी के 29 मामले दर्ज हैं, जिसमे 9 नाबालिग और 4 लड़कियां शामिल हैं। देहात क्षेत्र में सबसे कम गुमशुदगी के मामले ककौड़ थाने में दर्ज है। यहां यह आंकड़ा मात्र 1 है।
यहां अगर हम गुमशुदगी के मामले में कानून की बात न करें तो हम बता दे की सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार यदि गुमशुदा व्यक्ति की तलाश में तीन दिन से ज्यादा का समय लगता है तो एैसे में पुलिस को गुमशदगी के तहत दर्ज मामले को अपहरण की धाराओं में तरमीम कर देना चाहिए। लेकिन वास्तविक्ता इसके एकदम विपरित है। निठारी कांड के बाद पुलिस ने शुरूवाती दौर में कुछ गुमशुदगी के मामलों को अपहरण की धाराओं में तरमीम किया था, लेकिन समय के साथ पुलिय का रवैया पहले के जैसा हो गया।