संजय शर्मा. गाजियाबाद
सबुतों के अभाव में आरुषि कांड के दो ओर आरोपी अदालत से जमानत पर छुट गए। तीन महिने की जांच, जमकर शौर-शराबा, नतिजा वहीं ढाक के तीन पात। जी हां नोएडा की मर्डर मिस्ट्री आरूषि कांड में सीबीआई ने कुछ ऐसा ही कारनामा किया है। आज गाजियाबाद की विशेष अदालत ने आरोपी राजकुमार व कष्णा को 25-25 हजार रुपए की जमानत पर रिहा कर दिया। इस मामले में तीसरे आरोपी विजय मंडल को पहले ही जमानत पर रिहा किया जा चुका है। पुलिसिया कहानी में मुख्य आरोपी की भुमिका में रहे डाक्टर राजेश तलवार को पहले ही इस मामले से बरी किया जा चुका है। निठारी कांड में यह दुसरा मौका है जब सीबीआई की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आई है। 23 मई को हुई इस घटना में सीबीआई मौ ने मौकाए वारदात पर कई दिनों तक डेरा जमाए रखा। करीब 15 दिन लगातार नोएडा में जांच होने के बाद ब्यूरो ने कई अहम सबुतों के हाथ लगने का दावा किया था। सीबीआई अधिकारियों ने इस दावें की पुष्टि ·के लिए गिरफ्त में आए तीनों आरोपियों के ब्रेन मैपिंग और नार्को टैस्ट तक कराए। लेकिन इस सबका बाद पुलिस को महज नाकामी ही हाथ लगी।निठारी की तर्ज पर कार्रवाई करते हुए सीबीआई का अफसरों ने पहला काम मामले के मुख्य आरोपी डॉ. राजेश तलवार को हत्या कांड से बाहर निकालने का किया। सीबीआई ने डाक्टर तलवार को क्लीवचिट देने से पूर्व उनका ब्रेन मैपिंग और नार्को टैस्ट तक कराना भी जरूरी नहीं समझा, जबकि इन्हीं टैस्टों के दम पर सीबीआई राजकुमार, कष्णा और विजय मंडल को दोषी करार देने का प्रयास कर रही थी।
निठारी कांड में भी ऐसा ही हुआ
दिसंबर 2006 में हुए नोएडा के निठारी कांड में भी सीबाआई का रवैया हुबहू ऐसा ही रहा। सीबीआई द्वारा दाखिल आरोप पत्रों में मुख्य आरोपी मोनिंदर सिंह पंधेर को क्लीनचीट दे दी गई, जबकि बाद में गवाहों और सबुतों ·के बिना पर पंधेर पर अरोप तय किए गए।
कानूनविदों की राय
कानूनविदों की माने तो इस मामले से डाक्टर तलवार पुरी तरह बाहर आ गए हैं। नियमानुसार तलवार को क्लीनचीट देने के मामले में केवल तीनों आरोपियों को ही आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार है, लेकिन निर्धारित तीन माह की अवधि में किसी भी आरोपी ने अदालत में डाक्टर तलवार को बरी करने का विरोध नहीं किया है। इस मामले में विशेष अदालत ने भी सीबीआई की रिपोर्ट के आधार पर तलवार को बरी करने का आदेश जारी कर चुकी है।
सबुतों के अभाव में आरुषि कांड के दो ओर आरोपी अदालत से जमानत पर छुट गए। तीन महिने की जांच, जमकर शौर-शराबा, नतिजा वहीं ढाक के तीन पात। जी हां नोएडा की मर्डर मिस्ट्री आरूषि कांड में सीबीआई ने कुछ ऐसा ही कारनामा किया है। आज गाजियाबाद की विशेष अदालत ने आरोपी राजकुमार व कष्णा को 25-25 हजार रुपए की जमानत पर रिहा कर दिया। इस मामले में तीसरे आरोपी विजय मंडल को पहले ही जमानत पर रिहा किया जा चुका है। पुलिसिया कहानी में मुख्य आरोपी की भुमिका में रहे डाक्टर राजेश तलवार को पहले ही इस मामले से बरी किया जा चुका है। निठारी कांड में यह दुसरा मौका है जब सीबीआई की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आई है। 23 मई को हुई इस घटना में सीबीआई मौ ने मौकाए वारदात पर कई दिनों तक डेरा जमाए रखा। करीब 15 दिन लगातार नोएडा में जांच होने के बाद ब्यूरो ने कई अहम सबुतों के हाथ लगने का दावा किया था। सीबीआई अधिकारियों ने इस दावें की पुष्टि ·के लिए गिरफ्त में आए तीनों आरोपियों के ब्रेन मैपिंग और नार्को टैस्ट तक कराए। लेकिन इस सबका बाद पुलिस को महज नाकामी ही हाथ लगी।निठारी की तर्ज पर कार्रवाई करते हुए सीबीआई का अफसरों ने पहला काम मामले के मुख्य आरोपी डॉ. राजेश तलवार को हत्या कांड से बाहर निकालने का किया। सीबीआई ने डाक्टर तलवार को क्लीवचिट देने से पूर्व उनका ब्रेन मैपिंग और नार्को टैस्ट तक कराना भी जरूरी नहीं समझा, जबकि इन्हीं टैस्टों के दम पर सीबीआई राजकुमार, कष्णा और विजय मंडल को दोषी करार देने का प्रयास कर रही थी।
निठारी कांड में भी ऐसा ही हुआ
दिसंबर 2006 में हुए नोएडा के निठारी कांड में भी सीबाआई का रवैया हुबहू ऐसा ही रहा। सीबीआई द्वारा दाखिल आरोप पत्रों में मुख्य आरोपी मोनिंदर सिंह पंधेर को क्लीनचीट दे दी गई, जबकि बाद में गवाहों और सबुतों ·के बिना पर पंधेर पर अरोप तय किए गए।
कानूनविदों की राय
कानूनविदों की माने तो इस मामले से डाक्टर तलवार पुरी तरह बाहर आ गए हैं। नियमानुसार तलवार को क्लीनचीट देने के मामले में केवल तीनों आरोपियों को ही आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार है, लेकिन निर्धारित तीन माह की अवधि में किसी भी आरोपी ने अदालत में डाक्टर तलवार को बरी करने का विरोध नहीं किया है। इस मामले में विशेष अदालत ने भी सीबीआई की रिपोर्ट के आधार पर तलवार को बरी करने का आदेश जारी कर चुकी है।