नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस का जांबाज सुपरकॉप मोहन चंद शर्मा जिंदगी की जंग में हार गया। दक्षिण दिल्ली में आतंकी मुठभेड़ के दौरान इंस्पेक्टर शर्मा को तीन गोली लगी। घायल इंस्पेक्टर को गंभीर अवस्था में पास के होली फैमली अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां उसकी हालत नाजूक बनी हुई है। पुलिस महकमे में इंस्पेक्टर शर्मा का नाम कुछ गिनेचुने लोगों में शामिल था। आतंकियों और देश द्रोहियों के कट्टर दुश्मनों के रूप के मोहन चंद शर्मा का लिया जाता था। श्री शर्मा ने 20 साल की सर्विस में करीब 80 से अधिक आतंकियों को गिरफ्तार किया और तीन दर्जन आतंकियों को ढ़ेर किया। इसके अलावा 130 से अधिक नामचीन, कुख्यात व गैंगस्टरों को भी गिरफ्तार कर चुके है। हालत की गंभीरता को देखते हुए अपोलो के डॉक्टरों की एक टीम ने भी उनकी जांच की। लेकिन उनके शरीर से खून काफी मात्रा में बह गया था जिसकी वजह से डॉक्टरों के पास ज्यादा विकल्प नहीं थे।
शाम के समय एस्कॉर्ट्स के डॉक्टरों की एक टीम उनके इलाज को पहुंची लेकिन तब तक वे दम तोड़ चुके थे। उस समय अस्पताल में भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह और पीएम इन वेटिंग लालकृष्ण आडवाणी भी मौजूद थे। जांबाज इंस्पेक्टर की मौत पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने शोक प्रकट किया है। मध्य प्रदेश सरकार ने बहादुर इंस्पेक्टर के परिवार को 5 लाख रुपए और समाजवादी पार्टी ने 10 लाख रुपए देने की घोषणा की है। शहीद हुए इंस्पेक्टर मोहनचंद शर्मा के बेटे को डेंगू है और वह इस समय अस्पताल में भर्ती है। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि वे जांबाज अफसर का हालचाल पूछने आए थे लेकिन दुर्भाग्य से उन्हें श्रद्धांजलि देकर जाना पड़ रहा है।
बीस साल की नौकरी में किए कई बङे कारनामे
41 साल के इंस्पेक्टर शर्मा पिछले 20 साल से दिल्ली पुलिस की सेवा में थे। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में रहे शर्मा को उनकी बहादुरी के लिए 7 अवॉर्ड मिले थे। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने 35 आतंकवादियों के खात्मे और 80 आतंकियों की गिरफ्तारी में प्रमुख भूमिका निभाई थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक उन्होंने 40 अंतर्राज्यीय गैंगस्टरों को मार गिराया तथा 130 अन्य को गिरफ्तार किया। शर्मा ने दिल्ली में 1989 में सब इंस्पेक्टर के रूप में नौकरी शुरू की। उन्हें 1995 में आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला। स्पेशल सेल के इस इंस्पेक्टर को अपने नेटवर्क के लिए जाना जाता था।
शाम के समय एस्कॉर्ट्स के डॉक्टरों की एक टीम उनके इलाज को पहुंची लेकिन तब तक वे दम तोड़ चुके थे। उस समय अस्पताल में भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह और पीएम इन वेटिंग लालकृष्ण आडवाणी भी मौजूद थे। जांबाज इंस्पेक्टर की मौत पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने शोक प्रकट किया है। मध्य प्रदेश सरकार ने बहादुर इंस्पेक्टर के परिवार को 5 लाख रुपए और समाजवादी पार्टी ने 10 लाख रुपए देने की घोषणा की है। शहीद हुए इंस्पेक्टर मोहनचंद शर्मा के बेटे को डेंगू है और वह इस समय अस्पताल में भर्ती है। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि वे जांबाज अफसर का हालचाल पूछने आए थे लेकिन दुर्भाग्य से उन्हें श्रद्धांजलि देकर जाना पड़ रहा है।
बीस साल की नौकरी में किए कई बङे कारनामे
41 साल के इंस्पेक्टर शर्मा पिछले 20 साल से दिल्ली पुलिस की सेवा में थे। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में रहे शर्मा को उनकी बहादुरी के लिए 7 अवॉर्ड मिले थे। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने 35 आतंकवादियों के खात्मे और 80 आतंकियों की गिरफ्तारी में प्रमुख भूमिका निभाई थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक उन्होंने 40 अंतर्राज्यीय गैंगस्टरों को मार गिराया तथा 130 अन्य को गिरफ्तार किया। शर्मा ने दिल्ली में 1989 में सब इंस्पेक्टर के रूप में नौकरी शुरू की। उन्हें 1995 में आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला। स्पेशल सेल के इस इंस्पेक्टर को अपने नेटवर्क के लिए जाना जाता था।