इन्क्यूबेटर में आग से बच्चा 80 फीसदी झुलसा
मेरठ। अस्पताल के डाक्टरों की लापरवाही एक मां को अपने नवजात बच्चे से हमेशा के लिए दूर कर सकती है। मामला मेरठ के सुशीला जसवंत राय अस्पताल का है। नवजात शीशू जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है, जिसे 80 फीसदी जली हुई हालत में दिल्ली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। दरअसल डॉक्टरों ने बच्चे को इन्क्यूबेटर में रखने का फैसला किया था। कुछ देर बाद ही अचानक इन्क्यूबेटर में आग लग गई है और बच्चा बुरी तरह झुलस गया। बच्चे के जलने की खबर से अस्पताल प्रशासन के होश उड़ गए। चश्मदीदों के मुताबिक आग शॉर्टसर्किट से लगी। इस लापरवाही पर फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है। अस्पताल के ट्रस्टी केवल मामले की जांच कराने की कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक जसवंत राय अस्पताल में कविता नाम की महिला ने आज सुबह एक बच्चे को जन्म दिया। कुछ देर बाद ही डाक्टरों ने बच्चे हालत खराब बताकर उसे इन्क्यूबेटर में रखने को कहा। कुछ ही देर बाद अचानक इन्क्यूबेटर से धुंआ निकलता दिखाई दिया। जब तक अस्पताल कर्मचारी वहां पहुंचा तो बिस्तर समेत बच्चा झुलस चुका था। अस्पताल के स्टाफ ने जिस समय बच्चे को निकाला, तो उसकी हालत बहुत खराब थी जिस कारण डाक्टरों ने बच्चे को दिल्ली के अपोलो अस्पताल रैफर कर दिया, जहा उसकी हालत नाजूक बनी हुई है।
इस घटना में अस्पताल प्रशासन वहां व्यवस्था लगे स्टाफ पर 24 घंटे मरीजों की देखभाल का दावा करने वाले नर्सिंग होम में ऐसी लापरवाही कैसे हुई, आखिर इन्यूबेटर पर नजर रखने के लिए नर्स या अटेंडेंट वहां मौजूद क्य़ों नही थी, बच्चों को रखने वाले इन्क्यूबेटर में शॉर्ट शर्किट जैसे हादसे की नौबत कैसे आई व इन्क्यूबेटर की समय रहते जांच पड़ताल जैसे कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जाता है कि कविता का पहला बच्चा जन्म से पहले ही मौत के मुंह में समा गया था। भगवान ने दोबारा खुशियां इसकी झोली में डाली, जिसे शायद किसी की नजर लग गई।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक जसवंत राय अस्पताल में कविता नाम की महिला ने आज सुबह एक बच्चे को जन्म दिया। कुछ देर बाद ही डाक्टरों ने बच्चे हालत खराब बताकर उसे इन्क्यूबेटर में रखने को कहा। कुछ ही देर बाद अचानक इन्क्यूबेटर से धुंआ निकलता दिखाई दिया। जब तक अस्पताल कर्मचारी वहां पहुंचा तो बिस्तर समेत बच्चा झुलस चुका था। अस्पताल के स्टाफ ने जिस समय बच्चे को निकाला, तो उसकी हालत बहुत खराब थी जिस कारण डाक्टरों ने बच्चे को दिल्ली के अपोलो अस्पताल रैफर कर दिया, जहा उसकी हालत नाजूक बनी हुई है।
इस घटना में अस्पताल प्रशासन वहां व्यवस्था लगे स्टाफ पर 24 घंटे मरीजों की देखभाल का दावा करने वाले नर्सिंग होम में ऐसी लापरवाही कैसे हुई, आखिर इन्यूबेटर पर नजर रखने के लिए नर्स या अटेंडेंट वहां मौजूद क्य़ों नही थी, बच्चों को रखने वाले इन्क्यूबेटर में शॉर्ट शर्किट जैसे हादसे की नौबत कैसे आई व इन्क्यूबेटर की समय रहते जांच पड़ताल जैसे कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जाता है कि कविता का पहला बच्चा जन्म से पहले ही मौत के मुंह में समा गया था। भगवान ने दोबारा खुशियां इसकी झोली में डाली, जिसे शायद किसी की नजर लग गई।